रामगढ़ महोत्सव ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर की है पहचान – सांसद श्री सिंह

अम्बिकापुर.  आषाढ़ के प्रथम दिवस के अवसर पर रामगढ़ महोत्सव का दो दिवसीय आयोजन का गरिमामय शुभारंभ आज यहां राजमोहनी देवी भवन में सरगुजासांसद श्री कमलभान सिंह के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम भारतीय संस्कृति का निर्वहन करते हुये अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित करकार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर सीतापुर विधायक श्री अमरजीत भगत, लुण्ड्रा विधायक श्री चिन्तामणी महाराज, जिला पंचायतअध्यक्ष श्रीमती फुलेष्वरी सिंह उपस्थित रहे।

सांसद श्री कमलभान सिंह ने रामगढ़ महोत्सव की बधाई देते हुये कहा कि यह महोत्सव प्रति वर्ष मनाया जाना वाला ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक उत्सवहै। उन्होंने कहा कि रामगढ़ की पहाड़ी  ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में तथा विष्व के प्राचीनतम् नाट्यषाला के रूप में अपनी पहचानस्थापित किया है। रामगढ़ महोत्सव के द्वारा इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को और करीब से जानने का अवसर प्राप्त होता है। उन्हांेने कहा किमहाकवि कालिदास ने अपने खण्ड काव्य मेघदूतम् की रचना रामगढ़ की पहाड़ी में की थी जो संस्कृत की श्रेष्ठ काव्यों में से एक है। श्री सिंह ने कहा किआषाढ़ के प्रथम दिवस पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव से जहां प्रकृति में हरियाली के आगमन की खुषी झलकती है वहीं किसान वर्षा के आगमनसे कृषि कार्य की तैयारी के उल्लास में झूमने लगते हैं। श्री सिंह ने कहा कि पहले रामगढ़ महोत्सव का आयोजन स्थानीय शासकीय बहुउद्देेषीय उच्चतरमाध्यमिक विद्यालय अम्बिकापुर में छोटे स्तर पर होता था, लेकिन अब प्रदेष के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह एवं पूर्व संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहनअग्रवाल के पहल पर दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का भव्य आयोजन प्रति वर्ष हो रहा है। उन्होंने रामगढ़ महोत्सव में सभी को बढ़-चढ़कर भागीदारीलेने की अपील की।

इस अवसर पर सीतापुर विधायक श्री अमरजीत भगत ने रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि रामगढ़ महोत्सव के प्रथमदिवस में इतिहासकारों, साहित्यकारों एवं पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा शोधपत्रों का वाचन किया जाता है, जो जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा किरामगढ़ की पहाड़ी में दुर्लभ एवं पुरातात्विक नाट्यषाला अवस्थित है। इस पहाड़ी में कालिदास ने कई अद्भूत रचनाओं का सृजन किया है, जो हमारे लिएएक धरोहर है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों एवं विष्वविद्यालयों को अपने विद्यार्थियों के शोध के विषय के लिए रामगढ़ की पहाड़ी को भी शामिलकरना चाहिए, ताकि स्थानीय शोधार्थी इसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्टभूमि की गहराई तक पहुंच सकें।

लुण्ड्रा विधायक श्री चिंतामणी महाराज ने कहा कि महाकवि कालिदास ने मेघदूतम् की रचना रामगढ़ की पहाड़ी में की थी इसके साथ ही यह एषिया काप्राचीनतम् नाट्यषाला है। ऐसे दुर्लभ स्थल का हमारे जिले में होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ की पहाड़ी को विकसित कर वहां शोधसंस्थान खोला जाना चाहिए, ताकि शोधार्थियों को शोध के लिए आवष्यक संसाधन उपलब्ध हो सके और रामगढ़ को एक अलग पहचान मिल सके।

जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती फुलेष्वरी सिंह ने रामगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रामगढ़ महोत्सव सरगुजा जिले के साथ हीसाथ पूरे प्रदेष में विषिष्ट स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव महाकवि कालिदास की रचनाएं तथा भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृतियांको ताजा करती हैं, वहीं आषाढ़ महीने में बारिष आने की कामना से किसानों में उल्लास का संचार भी करता है। उन्होंने रामगढ़ की पहाड़ी के प्रांगण मेंआयोजित रामगढ़ महोत्सव में अधिक से अधिक लोगों को आने की अपील की। महापौर डॉ. अजय तिर्की ने रामगढ़ महोत्सव की बधाई देते हुए कहाकि यह महोत्सव जिले की ऐतिहासिक एवं गौरवषाली परंपरा को अक्षुण्य रखने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि रामगढ़ की पहाड़ी में जो साक्ष्यमिले हैं वे सिद्ध करते हैं कि यह पहाड़ी विष्व के प्राचीनतम् नाट्यषाला है।

कलेक्टर श्रीमती किरण कौषल ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि रामगढ़ महोत्सव के अंतर्गत आषाढ़ के  प्रथम दिवस पर आयोजित शोध संगोष्ठी मेंसरगुजा अंचल के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलांे तथा इमारतों से संबंधित शोधपत्रों का वाचन विद्धानों द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा किरामगढ़ महोत्सव के इस दो दिवसीय आयोजन से स्थानीय शोधार्थियों, साहित्यकारों एवं कलाकारों को मंच प्रदान करने का अवसर मिलता है। यहआयोजन यहां के बहुमूल्य संस्कृति को बताने के साथ ही तपती गर्मी से मुक्त कराने वर्षा के आगमन का संकेत भी देता है। उन्होंने कहा कि रामगढ़महोत्सव के प्रताप से ही यहां प्रदेष के अन्य स्थानों की अपेक्षा अच्छी बारिष होती है, जिससे यहां के किसान हमेषा खुष रहते हैं। श्रीमती कौषल नेरामगढ़ महोत्सव के आयोजन के लिए जिला प्रषासन की प्रतिबद्धता को दोहराया। पुलिस अधीक्षक श्री सदानंद कुमार ने संस्कृत में उद्बोधन देते हुएरामगढ़ की पहाड़ी की ऐतिहासिक महत्ता तथा महाकवि कालिदास की रचनाओं एवं उनके कृति के उद्देष्यों पर विस्तार से प्रकाष डाला। उन्होंने कालिदासकी खण्ड काव्य मेघदूतम् के प्रथम सर्ग का वाचन कर हिन्दी में व्याख्या किया।

इस अवसर पर वेदाचार्य डॉ. नितिन त्रिपाठी, डॉ. ललित शर्मा, श्री सीमांचल त्रिपाठी, श्रीमती राजलक्ष्मी पाण्डेय, श्रीमती गीता द्विवेदी, श्री राजनारायणद्विवेदी, श्रीमती पूनम दुबे, श्री विनोद तिवारी, श्री अजय चतुर्वेदी, ईष्वरी कुमार सिन्हा, डॉ. सचिन मंदिलवार, श्री सचिन शर्मा, श्री अरविन्द मिश्रा, श्रीचारूचन्द्र द्वारा शोधपत्रों का वाचन किया गया।

इस अवसर पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता गांधी, वनमण्डलाधिकारी श्रीमती प्रियंका पाण्डेय, अपर कलेक्टर द्वय श्रीनिर्मल तिग्गा एवं श्रीमती चन्द्रकांता ध्रुव, अनुविभागीय दण्डाधिकारी श्री अजय त्रिपाठी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आर.के. साहू, राजीव गांधीशासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य श्री एस.के. त्रिपाठी, पार्षद श्री आलोक दुबे सहि

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