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23 साल की सिमरन बन सकती थी इंजीनियर, अपने पसंद का आखिरी खाना खा कर बन गयी साध्वी

आज के समय में लोग

सासांरिक मायामोह में उलझे हुए हैं। हर कोई इन सुख-सुविधाओं का आदी हो चुका है और तो और लोग अब इनके बिना अपना जीवन बिताने की सोच तक नहीं सकते हैं। बता दें कि लेकिन आज भी कई लोग ऐसे हैं जो इस सब मोह माया को त्यागकर ईश्वर की राह में जाना चाहता है। जब आपसे कोई कहे कि वो इन सभी चीजों को त्यागकर के अध्यात्म अपनाना चाहता है तो आपको लगेगा की कि ऐसा कोई कैसे कर सकता है, आप उसको पागल समझेंग। आप कहेंगे कि ऐसा लोग पुराने जमानें में करते थे अब ऐसा कौन करता है। तो हम आपको बता दें कि आज भी कई ऐसे लोग हैं, जो इस तरह के कदम उठाते हैं।

आज हम आपको एक ऐसी ही लड़की के बारे में बताएंगे

जिसने पढ़ाई करी, ग्रेजुएशन करा फिर नौकरी करने की सोची, बता दें कि लकड़ी एक अच्छे घर से ताल्लुक रखती थी जो पूरी तरह से सम्पन्न था। किसी चीज की कोई कमी नहीं थी लेकिन इसके बावजूद भी उसने सबकुछ छोड़कर भगवान की शरण में जाना चाहा और अध्यात्म ग्रहण कर लिया।

ये मामला हैं इंदौर का जहां पर

बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में मुमुक्षु सिमरन जैन का दीक्षा महोत्सव हुआ। बता दें कि सिमरन की उम्र 23 साल हैं और इस उम्र में ही उन्होंने सांसारिक सुखों को त्यागकर साध्वी का जीवन जीने का फैसला लिया है। सिमरन की दीक्षांत समारोह श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट के तत्वावधान में हुआ। दीक्षा लेने से पहले उन्होंने अपना पूरा दिन घरवालों के साथ बिताया, हाथों में मेंहदी लगाई, सोलह श्रंगार किए और फिर अपनी मनपसंद भोजन किया।

दीक्षा लेने से पहले

उन्होंने सांसारिक वस्तुओं को छोड़ दिया, सबसे पहले उन्होंने अपने सभी जेवर अपनी मां को दे दिए और फिर अपने बालों का भी त्याग कर दिया। दीक्षा से पहले सिमरन ने कहा, “सांसारिक बुआ डॉ. मुक्ताश्री की राह पर ही आत्मिक सुकून और परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है, इसलिए वैराग्य धारण कर रही हूं.”

साध्वी बनने के उन्होंने कहा

मैं देशभर के कई खूबसूरत स्थानों पर घूमी और वहां वक्त बिताया लेकिन मुझे सुकून नहीं मिला. जब मैं गुरुजनों के सानिध्य में आई तब जाकर सुकून की प्राप्ति हुई. मुझे चकाचौंध भरी जिंदगी रास नहीं आई. यहां लोग आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल करते हैं जो उचित नहीं है. हमारे संत कम से कम संसाधनों में जीवन व्यतीत करते हैं. अधिक से अधिक पाने की बजाय आत्मा का परमात्मा से जुड़ना ही असली सुख है.”

बता दें कि सिमरन ने कम्प्यूटर साइंस से बीएसी किया है। उनके परिवार में उनके माता-पिता और उनकी एक बहन दो भाई हैं।

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