कमल हासन से सयानी घोष तक 5 राज्यों के चुनावों में नहीं चला किसी भी बड़े सितारे का जादू, ग्लैमर पर भारी पड़े…

बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनावों के कई तरह के विश्लेषण हो रहे हैं, लेकिन एक बात इन चुनावी नतीजों में खास है कि राजनीतिक मुद्दों और नेताओं के सामने फिल्मी सितारों की चमक फीकी ही रही। बंगाल में राजनीतिक पार्टियों ने सबसे ज्यादा सितारों को राजनीति के अखाड़े में उतारा। स्टार प्रचारक भी बनाया, लेकिन आखिर में लोकल मुद्दे और राजनीतिक चेहरों के आगे स्टार पॉवर फ्लॉप रहा।

कमल की हार सबसे करारी

कमल हासन की तमिल सिनेमा में कितनी अहमियत है, ये कोई बताने की बात नहीं। ये बात भी सही है कि शायद पूरे भारत में तमिलनाडु जैसी सिनेमा की दीवानगी कहीं देखने को नहीं मिलती है। जयललिता, एम. करुणानिधि और एम.जी. रामचंद्रन सब सिनेमा से ही राजनीति में आए थे। इस बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनने जा रहे स्टालिन भी सिनेमा से पॉपुलर हुए है। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चित चेहरा बने स्टालिन के बेटे उदयगिरि भी एक्टर रहे हैं।
कमल तमिल फिल्मों के दिग्गज सितारे माने जाते हैं। ‘एक दूजे के लिए’ से लेकर ‘चाची 420’ तक हिंदी के दर्शकों ने भी उनको काफी प्यार दिया है। कमल ने तीन साल पहले अपनी पार्टी मक्कल नीडि मैम ( जन न्याय पार्टी) बनाई थी। जयललिता और करुणानिधि दोनों के निधन के बाद तमिलनाडु में पैदा हुए वैक्यूम में कमल से उम्मीदें और बढ़ गई थीं, लेकिन कमल कोयम्बटूर दक्षिण की सीट से भाजपा की वनति श्रीनिवासन के सामने हार गए। तमिलनाडु में भाजपा इतने बड़े कद की पार्टी भी नहीं है। फिर भी कमल को हार का सामना करना पडा, ये साबित करता है कि कमल की फिल्मों को पसंद करने वाले लोगों ने भी उन्हें राजनेता के रूप में पसंद नहीं किया।

राजनीति की बिरयानी में स्टार सिर्फ बासमती राइस

तमिल फिल्मों के जाने-माने एक्टर मोहन ने ‘भास्कर’ के साथ बातचीत में कहा कि ‘कमल की हार से वो कतई चकित नहीं हैं। अगर अच्छी बिरयानी बनानी है, तो बासमती चावल के अलावा अच्छा कुक, मसाले, बर्तन, तेल, सब्जियां, नॉनवेज सब चाहिए। राजनीति में एक्टर सिर्फ बासमती चावल है, लेकिन जीत के लिए उसे और भी बहुत कुछ चाहिए होता है। इसमें कोई शक नहीं कि कमल हासन राजनीति के अच्छे बैट्समैन माने जा रहे थे, लेकिन प्रतिपक्ष वाले अच्छे बॉलर निकले। कमल को अभी जनता का भरोसा पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। कमल की ही पार्टी से तमिल एक्ट्रेस श्रीप्रिया और एक्टर एवं गीतकार स्नेहन भी चुनाव हार गए हैं।

भाजपा नेत्री और एक्ट्रेस खुशबू सुंदर।

खुशबू ने माना: पॉपुलैरिटी चुनाव जीतने का पैमाना नहीं

कमल हासन भाजपा के सामने हारे तो दूसरी और भाजपा में ही कुछ महीने पहले शामिल हुईं खुशबू सुंदर भी चुनाव हार गईं। अपने जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री खुशबू ने 2010 में डीएमके के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। वर्ष 2014 से लेकर 2020 तक कांग्रेस पार्टी के साथ रहीं। अक्टूबर 2020 में कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। खुशबू चेन्नई के हजार लाइट्स निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार थीं।
‘भास्कर’ से बातचीत में खुशबू ने बताया कि ‘मीडिया हमें एक्टर होने के मैग्नीफाइड ग्लास से देखता है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बाकी लोग भी तो चुनाव हारे हैं। अगर हम पॉपुलर हैं तो पॉपुलैरिटी कोई चुनाव जीतने का पैमाना नहीं है। इस बार डीएमके की लहर थी, जिसमें कमल हासन जैसे सुपर स्टार भी जगह नहीं बना पाए।’ खुशबू इस बात से खुश हैं कि कमल हासन को पटखनी देने वाली भाजपा की नेता हैं। वह कहती हैं कि कोयंबटूर से यह जीत बताती है कि तमिलनाडु में भाजपा का खाता खुला है।

बंगाल में भाजपा के तकरीबन सारे सेलेब्स हारे

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से थियेटर एक्टर बरतया बसु, निदेशक राज चक्रवर्ती, गायक अदिति मुंशी, एक्टर चिरंजीव, एक्टर लवली मित्रा, थियेटर एक्टर नयना बंदोपाध्याय, क्रिकेटर मनोज तिवारी, पूर्व फुटबॉलर बिदेश बोस, एक्टर कंचन मालिक, गायक इंद्रनील सेन, एक्टर जूने मालिहां चुनाव जीत गए हैं। जबकि तृणमूल से एक्टर सयानी घोष चुनाव हार गई हैं। एक्टर सयंतिका बनर्जी, कौशानी मुखर्जी भी हार गई हैं।

भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सेलिब्रिटीज में से सिर्फ फैशन डिजाइन अग्निमित्रा पॉल को छोड़कर बाबुल सुप्रियो, लॉकेट चटर्जी और यश दासगुप्त जैसे दिग्गज एक्टर और सिंगर चुनाव हार गए। बाबुल तो यहां के सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं, लेकिन ममता की आंधी में वह विधानसभा भी जीत नहीं पाए। बाबुल के सामने तृणमूल के अरूप विश्वास चुनाव जीते हैं। अरूप बिश्वास के प्रचार के लिए जया बच्चन भी टॉलीगंज पहुंची थीं। तब बाबुल ने बताया था कि हमारे जया बच्चन के साथ अच्छे रिश्ते हैं, मुझे उम्मीद है वो मेरे खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगी। यह स्टेटमेंट ही शायद बाबुल के आत्मविश्वास की कमी दिखा रहा था।

बंगाली सिनेमा के सुपर स्टार चिरंजीव चक्रवर्ती।

क्योंकि, वोट दीदी के नाम पर पड़े

तृणमूल कांग्रेस से तीसरी दफा भारी मतों से जीत हासिल करने वाले सुपर स्टार चिरंजीव चक्रवर्ती ने ‘भास्कर’ को बताया कि 292 सीटों में से खेल और सिनेमा के क्षेत्र से हमारे 16 कैंडिडेट थे। लगभग सभी जीत गए हैं, लेकिन भाजपा ने जिन एक्टर्स को टिकट दिया था, वो लगभग सभी हार गए हैं क्योंकि बंगाल में वोट दीदी के नाम पर पड़ा है। दीदी सभाओं में कहती थी कि आप कैंडिडेट मत देखो, मुझे देखो। 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके चिरंजीव चक्रवर्ती बताते हैं कि बंगाल के कलाकारों में राजनीतिक चेतना हमेशा से रही है। यहां सत्यजीत रे और बिमल रॉय जैसे फिल्मकार हुए हैं, जिनका अपना पॉलिटिकल स्टैंड हुआ करता था।

मिथुन सबसे ज्यादा घाटे में

बंगाल चुनाव से ठीक पहले ही मिथुन चक्रवर्ती ने पाला बदला था। तृणमूल से राज्यसभा सांसद भी रह चुके मिथुन ने भाजपा में आने के बाद जिस तरह अपनी रैली में भीड़ जुटाई थी और उन्हें ‘बंगाल का बेटा’ के रूप में पेश किया गया था, उसके बाद सियासी अटकलें जोरों पर थीं कि शायद भाजपा को बहुमत मिल जाए तो मिथुन भी मुख्यमंत्री की कुर्सी के उम्मीदवार हो सकते हैं। मिथुन का जादू नहीं चला। मुख्यमंत्री बनने की चाह में राज्यसभा की सीट भी छोड़ दी। मिथुन ने ममता का साथ छोड़ा, पर लोगों ने नहीं।

कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अलीमुल्लाह खान बताते हैं कि केरल जैसे राज्य में भी एक्टर सुरेश गोपी जैसे नेशनल अवॉर्ड विनर स्टार चुनाव हार गए हैं क्योंकि लोगों ने जमीनी मुद्दों को समझ लिया है, वे चकाचौंध और मुद्दों के बीच फर्क समझ गए हैं। लोगों को पता चल गया है कि कौन उनके काम करेगा और कौन जीत के बाद गायब हो जाएगा। इन नतीजों के बाद शायद ज्यादातर राजनीतिक दल सेलेब्स को टिकट देने से पहले सोचेंगे।

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