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इजराइल के पक्ष में बोलने वालों की हुई बेइज़्जती! नेतन्याहू ने 25 देशों को कहा शुक्रिया, लेकिन

वॉशिंगटन: इजरायल (Israel) और फिलिस्तीन (Palestine) के बीच जारी जंग पर अमेरिका (America) का बयान भी सामने आ गया है. राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने इजरायल का पक्ष लेते हुए कहा है कि उसे अपनी सुरक्षा का पूरा हक है. एक तरह से बाइडेन ने यह साफ कर दिया है कि वह इजरायल के साथ हैं और यदि भविष्य में दो देशों की यह लड़ाई वैश्विक रूप लेती है, तो यूएस इजरायल के समर्थन में खड़ा होगा. इससे पहले तुर्की ने फिलिस्तीन के समर्थन में बयान दिया था.

उधर संघर्ष इजराइल और फलस्तीन के बीच हो रहा है लेकिन भारत में भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेता और इनके समर्थक लगातार इजराइल के पक्ष में सोशल मीडिया पर सक्रिय है।

इजराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने आज सुबह सुबह एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने वर्तमान माहौल में इजराइल का समर्थन कर रहे 25 देशों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है लेकिन उन्होंने इसमें भारत का नाम भी नहीं लिया।

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इजराइली प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में समर्थन करने वाले जिन देशों का धन्यवाद किया है, उसमें उन्होंने अमेरिका, अलबेनिया, आॅस्ट्रेलिया, आॅस्ट्र्रिया, ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, साइप्रस, जाॅर्जिया, जर्मनी, हंगरी, इटली, स्लोवेनिया और यूक्रेन समेत 25 देशों का नाम शामिल हैं।

इजराइली प्रधानमंत्री ने छोटे छोटे देशों का नाम लिया लेकिन भारत का नाम लेना उचित भी नहीं समझा। यह भारत के लिए बेहद अपमानजनक है।

प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ट्वीटर पर लिखा है कि “आतंकी हमलों के विरुद्ध आत्मरक्षा के हमारे अधिकार का समर्थन करने और इसराइल के साथ मजबूती से खड़े होने के लिए आप सभी का शुक्रिया।”

हालांकि इसके पीछे की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि भारत में न सिर्फ इसराइल के समर्थन में बल्कि फलस्तीन के पक्ष में भी बड़ी संख्या में फेसबुक पोस्ट और ट्वीट किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि मौजूदा के मामले में भारत में कोई एक राय नहीं है।

इसके अलावा इजराइल और फलस्तीन के बीच चल रहे इस हिंसा पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

वैसे संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने 11 मई को सुरक्षा परिषद की बैठक में बेहद संतुलित बयान देते हुए कहा था कि दोनों पक्षों पर जमीन की यथास्थिति में बदलाव लाने से बचना चाहिए।

वहीं 12 मई को जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद परामर्श समिति की बैठक चल रही थी तो इस दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा था कि हम हिंसा की निंदा करते हैं।

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उन्होंने गाजा से राॅकेट हमले की भी निंदा की और कहा था कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल तनाव और हिंसा खत्म करने और शांति बहाल करने की जरुरत है।

मालूम हो कि भारत ने कई बार इजराइल के साथ राजनयिक संबंध बनाने की कोशिशें की लेकिन इजराइल ने अपनी ओर से भारत का लेकर कभी भी उत्साहवर्धक रवैया नहीं दिखाया, हालांकि इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू अगले महीने भारत के दौरे पर भी आ रहे हैं।

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