सप्लाई चेन पर बुरा असर डाल रही है डीजल की बढ़ी कीमतें, दुकान बंद करने पर मजबूर हो रहे छोटे ऑपरेटर

Diesel Price: डीजल की कीमतें पिछले 37 दिनों में से 29 दिन बढ़ी हैं, जिससे दिल्ली में इसकी खुदरा कीमत 9.55 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल की कीमतें भी पिछले 33 दिनों में से 26 दिन बढ़ी हैं, जिससे इसकी रिटेल कीमत 8.15 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है।

डीजल (Diesel) और पेट्रोल (Petrol) की कीमतें हर दिन नए मानक बना रही हैं और चौतरफा मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे रही हैं। यह सड़क परिवहन (Road Transport) संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है और छोटे ऑपरेटर लगातार अपनी दुकानें बंद कर रहे हैं क्योंकि वे सड़कों पर परिचालन लागत, ईएमआई, वैधानिक कर और जबरन वसूली की लागत को पूरा करने में असमर्थ हैं। यह बात ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) की ओर से कही गई है। एआईएमटीसी लगभग 95 लाख ट्रक ड्राइवरों और अन्य संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है।

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ईंधन की दरें मुंबई में 115 रुपये प्रति लीटर के पार हैं । सबसे महंगा ईंधन राजस्थान के सीमावर्ती शहर गंगानगर में है, जहां पेट्रोल 121.62 रुपये प्रति लीटर और डीजल 112.52 रुपये प्रति लीटर पर है। डीजल की कीमतें पिछले 37 दिनों में से 29 दिन बढ़ी हैं, जिससे दिल्ली में इसकी खुदरा कीमत 9.55 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल की कीमतें भी पिछले 33 दिनों में से 26 दिन बढ़ी हैं, जिससे इसकी रिटेल कीमत 8.15 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है।

ट्रक की परिचालन लागत में डीजल कीमत की हिस्सेदारी लगभग 65%

एआईएमटीसी के चेयरमैन कुलतारन सिंह अटवाल का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों से भारत के सड़क परिवहन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आजीविका का नुकसान हो रहा है। सड़क परिवहन क्षेत्र पर निर्भर करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी बचाने की चिंता पैदा हो गई है। डीजल की कीमत एक ट्रक की परिचालन लागत का लगभग 65% है। 85% से अधिक ट्रांसपोर्टर छोटे ऑपरेटर हैं, जिनके पास एक से पांच ट्रक हैं जिनमें से लगभग 65% सेल्फ इंप्लॉइड, मालिक-चालक हैं।

अटवाल ने आगे कहा कि देश की जनता और सड़क परिवहन क्षेत्र पर निर्भर 20 करोड़ से अधिक लोगों के खतरों के प्रति सरकार का असंवेदनशील व्यवहार अक्षम्य और तिरस्कारपूर्ण है। आर्थिक लॉकडाउन, कमजोर मांग, चौतरफा भ्रष्टाचार, डीजल की बढ़ोतरी और सरकार के उदासीन रवैये के हमले को झेल पाने में असमर्थ, पूरा सड़क परिवहन क्षेत्र जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहा है। डीजल की खपत का लगभग 43% परिवहन वाहनों द्वारा वहन किया जाता है, जबकि 13% किसानों द्वारा वहन किया जाता है।

सरकार से क्या चाहता है ट्रांसपोर्ट क्षेत्र

ट्रांसपोर्टर ईंधन मूल्य वृद्धि को वापस लेने और ईंधन पर करों को युक्तिसंगत बनाने की मांग करते हैं। केंद्र सरकार को अपना उत्पाद शुल्क कम करना चाहिए और राज्य सरकारों को अपना वैट कम करना चाहिए। पेट्रोल और डीजल के लिए उत्पाद शुल्क 32.9 रुपये प्रति लीटर और 31.8 रुपये प्रति लीटर है, जो मोटर ईंधन की इतनी ऊंची कीमत के पीछे एक प्रमुख कारण है। केंद्रीय और राज्य कर, ईंधन के खुदरा मूल्य में लगभग 70% हिस्सेदारी रखते हैं। पूरे देश में डीजल की एक समान दर होनी चाहिए। ईंधन की कीमतों का मासिक या तिमाही आधार पर संशोधन होना चाहिए। अगर सरकार हाल की वृद्धि को वापस नहीं लेती है और उपरोक्त मांगों को पूरा नहीं करती है तो भारत की सड़क परिवहन बिरादरी के पास उनके घाटे में चल रहे कार्यों को बंद करने के इलावा कोई विकल्प नहीं बचा है ।

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