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किसान नेताओं ने दिया मोदी सरकार झटका, 1 अप्रैल से इतने में दूध, दही, घी…

कृषि कानूनों के विरोध में अभी भी किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा है और धीरे-धीरे इस आंदोलन का दायर ओर बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने अब कृषि कानूनों के विरोध में बड़ा एलान किया है और दूध के दाम बढ़ाने की बात कही है। सिंघु बार्डर पर संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बैठकर फैसला लिया है कि एक मार्च से किसान दूध के दामों में बढ़ोतरी करेंगे और एक अप्रैल से दोगुने दाम पर दूध बेचा जाएगा।

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान मलकीत सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से किसान दूध के दामों में बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। 50 रुपये लीटर बिकने वाला दूध अब दोगुनी कीमत पर यानी 100 रुपये लीटर मेंं बेचा जाएगा। मलकीत सिंह ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने डीजल के दाम बढ़ाकर किसानों को चारों तरफ से घेरने का प्रयास किया है। लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा ने तोड़ निकलाते हुए दूध के दाम दोगुने करने का फैसला किया है। अगर सरकार अब भी न मानी तो आने वाले दिनों में आंदोलन को शांतिपूर्वक आगे बढ़ाते हुए हम सब्जियों के दामों में भी वृद्धि करेंगे।

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जब मलकीत सिंह से पूछा गया कि दूध के दाम 100 रुपये करने से जनता पर एकदम से बोझ बढ़ जाएगा। तो इसपर इन्होंने कहा कि अगर जनता 100 रुपये लीटर पेट्रोल ले सकती है तो फिर 100 रुपये लीटर दूध क्यों नहीं ले सकती। अब तक किसान एक लीटर दूध को नो प्राफिट नो लॉस पर बेचता आया है। ये तो अभी शुरुआत होगी अगर सरकार फिर भी कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है। तो आने वाले दिनों में सब्जियों के दाम दोगुने किए जाएंगे।

फसलों को लेकर भी दी चेतावनी

इससे पहले भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार को फसलों को लेकर भी चेतावनी दी थी और कहा था कि अगर इनकी मांगे नहीं मानी गई तो फसल तक को जला दिया जाएगा। हालांकि बाद में कुंडली बॉर्डर पर किसानों की बैठक में भाकियू अंबावता के महासचिव शमशेर दहिया ने कहा कि राकेश टिकैत ने फसलों को नष्ट करने के लिए नहीं कहा था। बल्कि उनका कहने का मतलब था कि सरकार मांग पूरी नहीं करती है तो किसान अपनी फसलों की देखरेख करने की जगह दिल्ली के बॉर्डर पर डटे रहेंगे। इसलिए किसी किसान को अपनी फसलों की जुताई नहीं करनी है। फसल नष्ट करने की जगह आंदोलन में सहयोग करना है। अगर आंदोलन लंबा चलता है तो उस फसल के पकने पर साथियों का सहयोग किया जा सकता है।

फसल नष्ट करने वाले बयान पर शमशेर दहिया ने कहा कि किसानों को खुद भी फसल नष्ट नहीं करनी है और अपने गांवों के किसानों को ऐसा नहीं करने की बात समझानी है। इसके साथ ही किसानों से बॉर्डर पर पहुंचकर आंदोलन मजबूत बनाए रखने का आह्वान करना है। गौरतलब है कि किसानों द्वारा दिल्ली के बॉर्डर पर किसान आंदोलन किया जा रहा है और सरकार को झुकाने के लिए किसानों नेताओं ने अब दूध के दाम बढ़ाने की धमकी दी है। इससे पहले किसान नेताओं ने 26 जनवरी के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर रैली भी निकाली थी। जिसने हिंसा का रूप ले लिया था।

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