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देश की दूसरी मुस्लिम महिला IPS अंजुम आरा, शहीद की बेटी को भी गोद ले कर सबके दिलों में जगह बनाई

किसी ने सच कहा है यदि मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो इंसान हर कुछ हासिल कर सकता है, अपने मजबूत हौसले और जज्बे से इंसान दूसरों के लिए मिसाल कायम कर सकता है, हर मनुष्य अपने जीवन में बड़े-बड़े सपने देखता है परंतु कुछ एक ही ऐसे लोग होते हैं जो अपने सपने को साकार कर पाते हैं, जीवन में कुछ पाने के लिए बहुत ही संघर्ष करना पड़ता है, जो संघर्ष करने से पीछे हट जाए तो उसको कामयाबी कभी भी नहीं मिल सकती, परंतु अगर मनुष्य निराशा हाथ लगने के बावजूद भी लगातार संघर्ष करता रहे तो उसको कामयाबी एक ना एक दिन जरूर मिलती है, आज हम आपको एक ऐसी महिला आईपीएस ऑफिसर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से खुद को साबित करके दिखाया है।

हम आपको जिसके बारे में जानकारी दे रहे हैं यह “अंजुम आरा” है, जो कि देश की दूसरी मुस्लिम महिला आईपीएस ऑफिसर है, अंजुम आरा यूपी के आजमगढ़ के छोटे से गांव कुम्हारिया की रहने वाली हैं, इन्होंने आईपीएस ऑफिसर बनने की ठानी, इनके मार्ग में बहुत सी बाधाएं उत्पन्न हुई, लोगों ने इनको हतोत्साहित किया, परंतु इसके बावजूद भी इन्होंने हार नहीं मानी और इन्होंने अपना सपना साकार कर दिखाया।

माता पिता का सपना था बेटी IPS अफसर बने

आपको बता दें कि अंजुम आरा के पिता का नाम आयुष शेख है जोकि जूनियर इंजीनियर थे, वर्ष 1992 से वर्ष 2006 तक इनकी पोस्टिंग सहारनपुर जिले में रही थी, इस दौरान में ही अंजुम आरा ने अपनी हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा सहारनपुर से ही पास की थी, हर मां-बाप का एक सपना होता है, वैसे ही अंजुम आरा के माता-पिता का भी सपना था कि उनकी बेटी आईपीएस ऑफिसर बन कर उनका नाम रोशन करें, माता-पिता के इस सपने को अंजुम आरा ने अपना ही सपना बना लिया और आईपीएस ऑफिसर बनने की तैयारी करने लगीं, जब यह बीटेक कर रही थी तब उसी दौरान इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारियां आरंभ कर दी थी।

रिश्तेदार और घरेलू दोस्त इनके फैसले के थे खिलाफ

जब अंजुम आरा आईपीएस ऑफिसर बनने की तैयारियां कर रही थी तब इनके परिवार के लोगों ने इनका पूरा सपोर्ट किया, विशेष रूप से इनके पिता अयूब शेख का पूरा सहयोग मिला था, परंतु रिश्तेदार और घरेलू दोस्त इनके इस फैसले के बिल्कुल खिलाफ थे, इन्होंने अपने रिश्तेदारों से बहुत कुछ सुना, रिश्तेदारों ने कहा कि बेटी परदे से बाहर कैसे निकलेगी, लेकिन पिता का सहयोग इनके साथ पूरा था, जिसके बलबूते पर इन्होंने इस मुकाम को हासिल किया, इनकी सफलता के पीछे इनके परिवार का पूरा साथ रहा था।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता

आईपीएस ऑफिसर बनने के लिए अंजुम आरा ने दिन-रात एक की, खूब मेहनत की, परंतु इनको प्रथम बार असफलता का सामना करना पड़ा था, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा से इन्होंने तैयारियां शुरू की, दूसरे प्रयास में इनको वर्ष 2011 में सफलता प्राप्त हुई थी, जब यह आईपीएस ऑफिसर बनी तो इनकी पहली पोस्टिंग मणिपुर के इंफाल में हुई थी, उसके पश्चात इनका तबादला हिमाचल प्रदेश में हो गया था, अंजुम आरा के कार्य को काफी सराहना भी मिली थी।

अंजुम आरा ने यूनुस खान के साथ शादी रचाई

आपको बता दें कि आईपीएस ऑफिसर अंजुम आरा ने आईएएस अधिकारी यूनुस खान से शादी रचाई है, यूनुस खान भी हिमाचल में ही पोस्टेड है, अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चित अधिकारियों में यूनुस खान शुमार है और यह जनता के लिए दिन रात हाजिर रहते हैं।

शहीद की बेटी को IAS अधिकारी यूनुस और IPS अधिकारी अंजुम आरा ने लिया गोद

बता दें कि आईएएस ऑफिसर यूनुस खान और आईपीएस ऑफिसर अंजुम आरा ने सरहद पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए पंजाब के तरनतारन के नायब सूबेदार परमजीत की बेटी खुशदीप को इन्होंने गोद लिया, इनका एक बेटा भी है, इनके इस कदम को देखकर लोगों ने इनकी खूब तारीफ की, इन दोनों के इस नेक कदम की चर्चा सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रही थी।

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