इसे ज्योतिरादित्य सिंधिया का शक्ति प्रदर्शन नही तो और क्या कहेंगे? सिंधिया भले ही आलाकमान का निर्णय स्वीकार करेंगे, लेकिन पर्दे के पीछे की हकीकत भी जान लीजिए

भोपाल। मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ ने मुखमंत्री की कुर्सी संभाली हैं तब से प्रदेश कांग्रेस में किसी ना किसी तरह की खींचतान चलती आ रही हैं। पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी के हाईकमान ने अचानक से कमलनाथ को मध्य प्रदेश का कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था। जिसके बाद पार्टी ने विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते हुए 15 साल बाद एमपी में कांग्रेस की सरकार बनाई और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने। लेकिन सरकार बनने के कुछ माह बाद ही पार्टी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद हेतु घमासान शुरू हो गया। पार्टी में गुटबाजी नजर आने लगी। पार्टी गुटों में बट गई। यह गुटबाजी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए देखी जा रही हैं। इसी बीच कल ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंदौर में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। कहने को तो यह कार्यकर्ता सम्मेलन था लेकिन एक तरह से देखा जाए तो  सिंधिया ने अपना शक्ति प्रदर्शन कर दिखाया है। और प्रदेश अध्यक्ष के सवाल पर पार्टी के निर्णय को स्वीकार करने की बात कही।

इसलिए यह सिंधिया का शक्ति प्रदर्शन कहलाया –

ज्योतिरादित्य सिंधिया एमपी में कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। प्रदेश सहित देशभर में उनको समर्थकों की संख्या का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद की दौड़ में हैं। रविवार को उन्होंने इंदौर के एक मैरिज गार्डन में 2 घण्टे से अधिक समय तक कार्यकर्ताओ से सीधे मुलाकात की। इस दौरान जो पांडाल बनाया गया था उसमें सिंधिया एवं उनके स्वर्गवासी पिता माधव राज सिंधिया के बड़ी संख्या में पोस्टर लगे हुए थे। साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ के भी प्रमुखता से पोस्टर लगाए गए थे। सिंधिया ने यहाँ 3 हजार कार्यकर्ताओ से सीधी मुलाकात की। पार्टी में चल रही खींचतान के बीच सिंधिया का इस तरह से कार्यकर्ताओ से मिलना एक तरह का शक्ति प्रदर्शन ही कह सकते हैं। यह केवल हम ही नही बल्कि प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक भी इसे सिंधिया का शक्ति प्रदर्शन बता रहें हैं।

पार्टी का निर्णय स्वीकार होगा –

बताया जा रहा हैं कि सिंधिया से मिलने के लिए कार्यकर्ताओ के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कार्यकर्ताओ से मिलने के बाद सिंधिया ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अपना खुन पसीना बहाकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनवाने वाले कार्यकर्ताओ की आन-बान- शान कायम रखना मेरा फर्ज हैं। मैंने 3 हजार कार्यकर्ताओ से सीधी मुलाकात की हैं। केवल मध्य प्रदेश में नही बल्कि पूरे देश में संगठन को फिर से जीवित करना बेहद महत्वपूर्ण हैं। वही प्रदेश अध्यक्ष बनने की दावेदारी के सवाल का उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि पार्टी आलाकमान जो भी निर्णय लेगा वह मुझे स्वीकार होगा।

वनमंत्री और दिग्विजय में भी हुई थी जुबानी जंग –

मध्यप्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच भी पिछले दिनों जुबानी जंग शुरू हुई थी। जिसमे सिंधिया ने सिंघार का समर्थन किया था। यह खींचतान भी प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए देखी गई थी। बताया जाता हैं कि एमपी में कांग्रेस दो मुख्य गुटों में बटी हुई हैं जिसमे एक है सिंधिया गुट तो दूसरा मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय का गुट हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान भी फैसला लेने में असक्षम दिखाई दे रही हैं कि किसे प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौपी जाए। साथ ही पार्टी को यह डर भी हैं कि गुटबाजी के कारण कही मध्य प्रदेश में लंबे समय के बाद हाथ आई सत्ता ना चली जाए।

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