अप्सरा मंजू घोषा ने पापों से मुक्ति पाने के लिए रखा था पापमोचनी एकादशी का व्रत, पढ़ें ये कथा

हर महीने दो एकादशी आती हैं। पहली एकादशी महीने के शुक्ल पक्ष में आती है और दूसरी कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार से पूरे वर्ष में कुल मिलाकर 24 एकादशी आती हैं। एकादशी के दिन विष्णु जी का पूजन का विधान है। माना जाता है कि एकादशी का व्रत करने से हर कामान पूर्ण हो जाती है और पापों से मुक्ति मिल जाती है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है और इस एकादशी के दौरान दो प्रमुख त्योहार भी आते हैं, जो कि होली और नवरात्रि है। इस बार पापमोचनी एकादशी 07 अप्रैल 2021 को आ रही है।

पापमोचनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि आरंभ 07 अप्रैल 2021 प्रातः 02 बजकर 09 मिनट से शुरू हो जाेगा। एकादशी तिथि 08 अप्रैल 2021 प्रातः 02 बजकर 28 मिनट तक होगी। हरिवासर समाप्ति समय 08 अप्रैल को सुबह 08 बजकर 40 मिनट पर होगा। एकादशी व्रत पारण समय- 08 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 04 बजकर 11 मिनट तक है।

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पापमोचनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा

चैत्ररथ नामक एक बहुत सुंदर वन था। जहां पर च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या करते थे। मेधावी ऋषि शिव भक्त थे। एक दिन कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजू घोषा नामक अप्सरा को उनके पास भेजा। उसने अपने नृत्य और सौंदर्य से मेधावी मुनि का ध्यान भंग कर दिया और मुनि मेधावी मंजू घोषा पर मोहित हो गए। मुनि मंजू घोषा के साथ रहने लगे। काफी सालों तक उनके साथ रहने के बाद मंजू घोषा ने वापस जाने की इच्छा जाहिर की। तब मेधावी ऋषि को अपनी भूल का अहसास हुआ और पता चला कि मंजू घोषा ने उनकी तपस्या को भंग किया था। क्रोधित होकर उन्होंने मंजूघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दे दिया।

अप्सरा ने उनसे माफी मांगी और श्राप से मुक्ति को कहा। तब मेधावी ऋषि ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा। इन्होंने कहा कि तुम्हारे समस्त पापों का नाश हो जाएगा, तुम बस इस एकादशी का व्रत कर लो। इसके बाद मेधावी ऋषि अपने पिता के महर्षि च्यवन के पास पहुंचे और उन्हें पूरी बात बताई।

जिसपर उन्होंने कहा कि तुमने अच्छा नहीं किया, ऐसा कर तुमने भी पाप किया है। इसलिए तुम भी पापमोचनी एकादशी का व्रत करो। पापमोचनी एकादशी का व्रत करके अप्सरा मंजूघोषा को श्राप से मुक्ति मिल गई और मेधावी ऋषि के भी सभी पापों से निजात मिल गई। पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और दुखों से छुटकारा मिल जाता है। मनुष्य को मानसिक शांति प्राप्ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। कई लोग इस दिन अनुष्ठान भी करते हैं।

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