Home Political Samachar Shahabuddin Death: वे 4 शब्द, जिन्होंने तबाह कर दी शहाबुद्दीन की जिंदगी

Shahabuddin Death: वे 4 शब्द, जिन्होंने तबाह कर दी शहाबुद्दीन की जिंदगी

2016 में जमानत पर बाहर आने के बाद एक सवाल के जवाब में शहाबुद्दीन ने नीतीश कुमार के बारे में कहा था – परिस्थितियों के CM हैं. यही वे चार शब्द थे, जिन्होंने तब JDU को बेहद नाराज कर दिया था.
आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन अब इस दुनिया में नहीं रहे, कोरोना ने उनकी जिंदगी लील ली. लेकिन शहाबुद्दीन की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं. एक बात की चर्चा बहुत हो रही है कि क्या शहाबुद्दीन की ज़ुबान से अगर वे चार शब्द न निकले होते, तो शायद आज शहाबुद्दीन जिंदा होते. आखिर वे कौन से चार शब्द थे, जिन्होंने शहाबुद्दीन की जिंदगी में बड़ा तूफान मचा दिया था.

वाकया 2016 का है

दरअसल यह वाक़या 2016 का है, जब शहाबुद्दीन भागलपुर जेल में बंद थे और उन्हें तभी कोर्ट से जमानत मिली थी. बेल मिलने के बाद वे अपने घर सिवान पहुंचे. वहां पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि आपके नेता कौन हैं. तब उन्होंने कहा था कि उनके नेता सिर्फ और सिर्फ लालू यादव हैं. जब नीतीश कुमार के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जो चार शब्द नीतीश कुमार के बारे में कहे, उन्हीं शब्दों ने शहाबुद्दीन की जिंदगी पर बड़ा असर डाल दिया.,

ये कहा था शहाबुद्दीन ने
शहाबुद्दीन ने नीतीश कुमार के बारे में कहा था – परिस्थितियों के CM हैं. यही वे चार शब्द थे, जिन्होंने तब JDU को बेहद नाराज कर दिया था. उस वक्त बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और नीतीश कुमार इसके मुख्यमंत्री थे. उस वक्त भाजपा विरोधी पार्टी थी और भाजपा ने शहाबुद्दीन के कहे चार शब्दों के बहाने खूब हमला बोला था. साथ ही भाजपा ने यह भी आरोप लगाया था कि शहाबुद्दीन के बाहर निकलने से बिहार का माहौल खराब होगा.

सियासत हुई थी गर्म

बिहार की सियासत तब बहुत गर्म थी और शहाबुद्दीन के नीतीश कुमार के बारे में दिए इस बयान के बाद JDU और राजद के संबंधों में तल्खी बढ़ती गई थी. तब शहाबुद्दीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए JDU के प्रवक्ता और MLC नीरज कुमार ने कहा था कि बिहार में कानून का राज है. हम कानून का ऐसा इंजेक्शन देते हैं कि जिसे इंजेक्शन लगता है वह आह बोलता है और जनता वाह बोलती है. नीतीश कुमार जनता के मत से मुख्यमंत्री बने हैं, किसी के अहसान से नहीं. JDU की तरफ से आया यह बयान तब राजद और JDU के संबंधों को और कड़वा कर गया था. इसी के बाद बिहार सरकार हाईकोर्ट पहुंच गई शहाबुद्दीन के बेल को कैंसिल करवाने और आखिरकार शहाबुद्दीन की बेल कैंसिल हुई और शहाबुद्दीन फिर से जेल पहुंच गए और तब से मौत होने तक जेल में ही रहे.

2000 में नीतीश के सपने चूर किए थे शहाबुद्दीन ने

लेकिन यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर नीतीश कुमार और शहाबुद्दीन एक दूसरे से इतने नाराज क्यों थे. दरअसल इसकी नींव पड़ी थी 2000 में. इस वक्त नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने थे और उन्हें बहुमत साबित करना था. तब नीतीश कुमार को कुछ छोटी पार्टियों ने समर्थन दिया था और कांग्रेस भी लगभग टूटने वाली थी. उसका भी समर्थन नीतीश कुमार को मिलने वाला था. लेकिन तभी शहाबुद्दीन ने सारा खेल बिगाड़ दिया. न कांग्रेस को टूटने दिया और न ही छोटी पार्टियों को नीतीश से जुड़ने दिया. नतीजा निकला कि नीतीश कुमार समर्थन नहीं जुटा पाए और मात्र 5 दिन में ही नीतीश कुमार की सरकार गिर गई.

2005 में नीतीश ने दिखाई अपनी ताकत

2005 में पासा पलट गया और नीतीश कुमार शानदार बहुमत से सत्ता में आए. मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने शहाबुद्दीन पर शिकंजा कसना शुरू किया और शहाबुद्दीन के सारे केस खोल दिए गए. स्पीडी ट्रायल शुरू हुआ. शहाबुद्दीन जेलों के चक्कर काटते रहे. फिर जब 2016 में बाहर आए तो उन्होंने नीतीश कुमार के बारे में 4 शब्द कहे, जिसकी वजह से उन्हें जीवन भर जेल में ही रहना पड़ा.

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