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आज भी मंदिर के बहार फूल बेचकर योगी आदित्यनाथ की बहन कर रही है गुजारा , हर रक्षाबंधन को करती है याद

भारत में राजनीती एक ऐसी चीज है जिस के कारण एक छोटे से छोटा नेता भी भ्रष्टाचार करने से नहीं चुकता यही तक की भी यदि गांव में कोई प्रधान बन जाता है तो वो सात पुश्तों के खाने कमाने का इंतजाम कर ही देता है। और उसके घर का हर सदस्य आपने आपको प्रधान समझता है वहीं यदि किसी के परिवार में मां बाप या भाई मुख्यमंत्री बन जाये तो फिर पूरा परिवार ही मुख्यमंत्री बन जाता है। लेकिन हमें ये बात भी ध्यान रखनी है की भारत में हर नेता एक जैसा नहीं हो सकता क्योकि इसके अपवाद के रूप में ऐसे कई नेता है जैसे डॉ अब्दुल कलाम सहाब और अटल बिहारी वाजपेयी आदि. इसी के चलते आज हम आपको भारत के ऐसे मुख्यमंत्री से रूबरू कराने वाले है जिसका परिवार गांव के पुस्तैनी साधारण से मकान में ही अपना जीवन व्यतीत कर रहा है, और तो और उसकी बहन भी मंदिर के बाहर सड़क किनारे फूल बेचकर अपने घर का खर्चा चला रही है। तो चलिए जानते है इनके बारे में…

पति के साथ मिलकर चलाती हैं दुकान

योगी आदित्‍यनाथ की बड़ी बहन शशि के पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं। पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में योगी और उनका बचपन बीता है। यहां से 30 किलोमीटर दूर कुठार गांव में योगी की बहन पति के साथ मिलकर एक बेहद छोटी दुकान चलाती हैं। इसमें वे माला-फूल, मैगी जैसी छोटी-मोटी चीजें बेचती हैं। मगर किसी को नहीं बताती हैं कि वे योगी की बहन हैं। शशि को एक बेटा और दो बेटियां हैं।

राजनीति में देखा जाए तो भारत के उत्तर में बिहार से लेकर दक्षिण तमिलनाडू तक में पूर्व मुख्यमंत्रियों की बेटियां भी पिता की बेनामी संपत्ति पर राज कर रही है। आपको बता दे की तमिलनाडू के पूर्व सीएम की बेटी कनिमोझी को तो जेल तक हो आई हैं। और वहीं बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती भी जेल जाने को तैयार है, और इस सबके पीछे का कारण है मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए कमाया गया कालाधन और उसका उपयोग। लेकिन इन सबके बीच देश के सबसे बड़ी आबादी के सीएम योगी आदित्यनाथ है जिनकी खुद की बहन और परिवार आज भी साधारण तरीके से जीवन जी रहे हैं। शशि बताती हैं कि योगी बचपन से ही गंभीर थे। बचपन में कभी भी भाई-बहन में लड़ाई-झगड़ा नहीं होता था। 1991 में शादी के बाद शशि अपने ससुराल आ गईं और योगी आदित्‍यनाथ राम मंदिर आंदोलन से जुड़े। इसी दौरान वे महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए और गोरखपुर गए।

बताया जाता है की देवभूमि के पौड़ी गढ़वाल जिले में नीलकंठ मंदिर पर जहां योगी की 3 बहनों में सबसे छोटी बहन शशि मंदिर में प्रसाद और फूलों की माला बनाकर बेचती है। कहा जाता है की शशि अपने पति पूरण के साथ नीलकंठ मंदिर के पास पार्वती धाम में फूल प्रसाद माला की दुकान चलाती है और एक झोंपड़ी में अपने परिवार के साथ अपना जीवन बीता रही है। बताया गया है की इनकी फूलो की दूकान नीलकंठ मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर ऊपर पार्वती मंदिर के पास है। लेकिन योगी आदित्यनाथ की बहन यहां रहती है इस बात को आज तक कोई नहीं जानता है। वही शशि भी नहीं चाहती की किसी को पता चले की वो योगी आदित्यनाथ की छोटी बहन है।

CM yogi adityanath

योगी ने कब से नहीं की अपनी बहन से बात

योगी की बहन शशि ने का कहना है कि उनकी शादी सन 1992 में गढ़वाल के रहने वाले पूरन से हो गई थी। और शशि की शादी के बाद ही योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय बिष्ट अपना घर छोड़कर चले गए। शशि ने बताया कि जब से योगी सांसद बने तब से लेकर अब तक भाई योगी से कोई बातचीत नहीं हो पाई। शशि ने कहा कि परिवार में सबकुछ सही चल रहा था हम 7 भाई-बहनों के साथ योगी भी पढ़ाई लिखाई करते थे और परिवार के कामों में भी बहुत समझदार थे।

शशि ने बचपन को याद करते हुए कहा कि योगी को स्कूल से लाने और ले जाने का काम में ही करती थी। अब भाई के सीएम बनाने के बाद कई लोग पूछते हैं और मजबूरन हमें मना करना पड़ता है कि मै उनकी बहन नहीं हूं। शशि ने भावुक होकर बताया की वह अपने परिवार में बेहद खुश हैं लेकिन दुख तो इसी बात का है कि पिछले 27 सालों से मेरी भाई योगी और परिवार से कोई बात नहीं ही पाई। इसके बाद आखिर में नम आंखों से योगी की बहन शशि ने कहा, बचपन में रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन वह अपने चारों भाइयों को सामने बैठाकर राखी बांधती थीं तब योगी आदित्यनाथ उनसे यही कहते थे कि में अभी कुछ नहीं कमा रहा हूं, लेकिन जब बड़ा हो जाऊंगा तब में तुम्हें खूब उपहार दूंगा।

सभी साधुओं में ढूंढती थीं भाई योगी को

शशि को जब पता चला कि उनका भाई साधु बन गया, तो कुठार गांव आने वाले सभी साधुओं को देखती थीं कि कहीं वह उनका भाई तो नहीं है। लगता था कि गांव में जैसे भिक्षा मांगने वाले होते हैं, वैसे ही उनका भाई भी होगा। हालांकि जब पता चला कि उनका भाई गोरखुपर का महंत बन गया है, तब दूसरे साधुओं में अपने भाई को ढूंढना बंद कर दिया।

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