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श्रीलंका में ना रोटी है, ना कपड़ा है, ना मकान है और ना ही कोई सरकार है

जनता के गुस्से के बाद श्रीलंका के पीएम ने मानी हार, राष्ट्रपति भी हो गए फरार

सरकार की किलेबंदी को जनता ने ढहाया, श्रीलंका अब सड़क पर आया

जिनपिंग के जाल में लंका हुआ कंगाल, महंगाई से श्रीलंका की जनता बेहाल

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जो लोग भारत में प्रधानमंत्री मोदी को पानी पी पी के बुरा भला कहते हैं, आंखें फाड़ कर देख लें,क्या हश्र हो गया है श्रीलंका का। मोदी हैं, जो देश को बचा रखा है, नहीं तो भारत का भी वही हश्र होता जो आज श्रीलंका और पाकिस्तान का हो चुका है। कंगाल हो चुका पाकिस्तान चीन के अलावा दूसरे देशों के आगे हाथ फैला रहा है। और श्रीलंका का हाल तो ऐसा हो गया है कि वह किसी के आगे हाथ फैलाने के लायक भी नहीं बचा। वहां ना कोई सरकार है ना कोई तरफदार है। जनता महंगाई और बेरोजगारी से बेहाल है। हालात इतने ख़राब हो गए हैं, कि लोग दो वक्त की रोटी के लिए भी जूझ रहे हैं, कुछ भी खरीदने से पहले लोग 1000 बार सोच रहे हैं। सरकार बदल रही है लेकिन हालात वही बने हुए हैं। श्रीलंका आज़ादी के बाद सबसे ख़राब आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है। ज़रूरी चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं और देश के क़रीब 2.2 करोड़ लोगों का जीना मुहाल हो गया है। हालत यह है कि दुनियाभर में अपनी बेमिसाल चाय के लिए मशहूर श्रीलंका के लोगों को चाय की एक चुश्की मयस्सर नहीं हो रही है। देश में दूध वाली चाय की एक प्याली की क़ीमत 100 रुपये से ऊपर पहुंच गई है। अगर भारतीय रुपये के हिसाब से देखें तो क़ीमत क़रीब 29 रुपये बैठती है। इसके अलावा कई जरूरी चीज़ों के दाम दोगुने हो चुके हैं। पेट्रोल डीज़ल की बात तो छोड़ ही दीजिए। श्रीलंका बुरी तरह से फंस चुका है, लेकिन इस हालात के लिए वहां की सरकार कैसे ज़िम्मेदार है, सब बताएंगे, इसकी इनसाइड स्टोरी समझाएंगे, लेकिन उससे पहले जान लीजिए कि आज श्रीलंका इस हालात में कैसे पहुंचा।

असल में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है

कोरोनावायरस की वजह से वहां की सरकार ने पर्यटन पर रोक लगा दिया था

और ऑर्गेनिक खेती करने के लिए सरकार ने खाद के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दिया था

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जब कोरोनावायरस के ख़त्म होने के बाद धीरे-धीरे दुनिया सांस लेने लगी थी, आरोप है कि तब भी श्रीलंका की सरकार ने पर्यटन में ढील नहीं दी और दूर का कोई प्लान तैयार नहीं कर पाई। जिसकी वजह से श्रीलंका क़र्ज़ में फंसता चला गया और महंगाई बढ़ती गई। जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई, जनता के सब्र का बांध टूट गया, और जनता ने विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन आर्थिक रूप से कंगाल हो चुका श्रीलंका 1 दिन में कंगाल नहीं हुआ है बल्कि इसके पीछे बहुत लंबी कहानी है जो राजपक्षे परिवार से जुड़ी है।

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श्रीलंका में कई दशकों से सत्ता संभाल चुके राजपक्षे परिवार का काफ़ी दबदबा रहा है

श्रीलंका में इसी परिवार के चार भाइयों ने सत्ता पर राज किया है

राजपक्षे परिवार ने श्रीलंका की क्षेत्रीय राजनीति से अपनी शुरुआत की थी। साल 2005 में महिंदा राजपक्षे देश के राष्ट्रपति चुने गए

महिंदा राजपक्षे ने अपने छोटे भाई और तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को डिफ़ेंस सेक्रेट्री नियुक्त कर दिया

उन्होंने अपने एक और छोटे भाई बासिल राजपक्षे को राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया

साल 2010 में वो फिर से राष्ट्रपति चुने गए, सबसे बड़े भाई चमल राजपक्षे को भी कई बार मंत्री बनाया गया
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2015 का राष्ट्रपति चुनाव महिंदा राजपक्षे हार गए, लेकिन साल 2019 में फिर से राजपक्षे परिवार श्रीलंका के सबसे बड़े पद पर क़ाबिज़ हुआ। इस बार महिंदा राजपक्षे के भाई गोटाबाया राजपक्षे राष्ट्रपति चुने गए। उनके सत्ता में आते ही भाई महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री चुन लिए गए। तो अब आप समझ ही गए होंगे कि कैसे परिवारवाद और निरंकुशता ने श्रीलंका की हालत ख़राब कर दी। आर्थिक हालात से जूझ रहे श्रीलंका ने भारत से भी मदद मांगी और भारत ने बाकायदा मदद की भी, मोदी ने लंका को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, सब कुछ बद से बदतर हो चुका था। श्रीलंका की कंगाली की एक और वजह है वह यह कि चीन ने श्रीलंका में काफ़ी निवेश किया है, और कहा जाता है कि श्रीलंका की ये हालत चीन के क़र्ज़ जाल में फंसने की वजह से हुई है। साल 2019 में सरकार ने अपनी विदेशी क़र्ज़ की अरबों रुपये की किस्त चुकाने के लिए सभी ज़रूरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। बताया जा रहा है कि इन्हीं वजहों से श्रीलंका आज कंगाली हुआ। श्रीलंका पर कई देशों का क़र्ज़ है, लेकिन वो क़र्ज़ की किस्त तक नहीं दे पा रहा। महंगाई और बेरोज़गारी की मार झेल रही जनता जब सड़क पर उतरी तो राष्ट्रपति को इस्तीफ़ा देना पड़ा। लेकिन नाराज़ और गुस्से से आगबबूला हो चुकी जनता इस्तीफ़े के बाद भी नहीं मानी और जमकर आगजनी की। बताया जा रहा है, कि श्रीलंका के प्रधानमंत्री के निजी आवास पर गुस्साई जनता ने आग तक लगा दी। ख़बर है कि जनता के आक्रोश को देखते हुए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे इस्तीफ़े के बाद आवास छोड़कर भाग गए। अब आने वाले दिनों में श्रीलंका में सियासत में क्या होगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन आपको क्या लगता है कि इस दुर्दशा के लिए कौन ज़िम्मेदार है कमेंट कर जरूर बताएं।

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