Home ख़बर जरा हटकर टेली कॉलर से IPS तक ‘सूरज’ के चमकने की कहानी आपको ऊर्जा...

टेली कॉलर से IPS तक ‘सूरज’ के चमकने की कहानी आपको ऊर्जा से भर देगी

बदलाव के इस दौर में युवाओं के पास करियर बनाने के यूं तो कई सारे ऑप्शन हैं, लेकिन आज भी एक चीज ऐसी है जिसमें कोई बदलाव नहीं आया और वो है IAS/IPS बनने यानि सिविल सर्विस में जाने का ख्वाब। ये एक ऐसा ख्वाब है जो हमेशा से युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है। लेकिन दुर्भाग्य देश में ऐसी अनगिनत प्रतिभाएं हैं जो संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में मंजिल तक नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे में इनकी मदद का बीड़ा उठाया है एक ऐसे युवा अफसर ने, जिन्होंने विपरीत परिस्थितयों के बीच सभी अभावों को पीछे छोड़ते हुए पहले खुद को एक खास मुकाम पर पहुंचाया और अब अपने जैसे जरूरतमंद युवाओं के भविष्य को संवारने और सही दिशा दिखाने का काम भी बखूबी कर रहे हैं।
जिंदगी इक इम्तिहां है, इम्तिहां का डर नहीं, हम अंधेरों से गुजर कर रौशनी कहलाएंगे…सरदार अंजुम के इस शेर की तरह जिंदगी की तमाम तकलीफों से जीत कर आगे बढ़े आईपीएस और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के एसपी सूरज परिहार आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उनके जीवन संघर्ष की कहानी कुछ पुरानी जरूर है, लेकिन आज वो जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे किया गया संघर्ष आज भी हर युवा में कुछ कर गुजरने का जोश भर रहा है। (IPS Suraj Singh Parihar Biography) उनकी कहानी उन तमाम लोगों के लिए अंधकार में रोशनी की किरण की तरह है जिनके सपने मुसीबतों के आगे हार मानकर दम तोड़ देते हैं।

उत्तरप्रदेश के छोटे से गांव जौनपुर से ताल्लुक रखने कारण सूरज को बचपन में पढ़ाई की अच्छी सुविधा नहीं मिल सकी। घर में बड़े होने के कारण शुरू से जिम्मेदारियों का बोझ, ग्रामाीण परिवेश में संसाधनों की कमी, आर्थिक चुनौतियां और मुफलिसी के तमाम रंग…लेकिन कुछ भी सूरज को अपने ख्वाबों तक पहुंचने से नहीं रोक सका। सूरज जी का मानना है कि हर वो आवाज, जो आपको कुछ अच्छा करने से रोके, उसे आप अपनी जीत के बाद की तालियों की तरह सुनें और जिंदगी में आगे बढ़ते रहें। सूरज सिंह परिहार का बचपन जौनपुर में अपने दादा-दादी से देशभक्ति और मानवता की कहानियां सुनते हुए गुजरा। जब वो 10 साल के थे तब उनके पिता कानपुर के जाजमऊ में शिफ्ट हो गए। यहां सूरज का दाखिला एक हिंदी-मीडियम स्कूल में हुआ। (IPS Suraj Singh Parihar Biography) सूरज पढ़ने-लिखने के साथ ही खेल, कविता राइटिंग और पेंटिंग में भी अव्वल थे। साल 2000 में उन्हें क्रिएटिव राइटिंग और कविता के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण के हाथों बाल श्री अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया। पुराने दिनों को याद करते हुए सूरज बताते हैं कि पांचवी क्लास तक वो दादा-दादी से रोजाना महापुरुषों की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए। जिसके चलते छोटी उम्र से ही उनके मन में देश और समाज सेवा का जज्बा जाग उठा।

सूरज ने सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई करते हुए 75 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं की परीक्षा पास की। जबकि 12वीं के बोर्ड एग्जाम में पांचों सब्जेक्ट में डिस्टेंक्शिन के साथ 85 प्रतिशत लाते हुए स्कूल में टॉप किया। स्कूल स्तर की इस कामयाबी के बाद सूरज का हौंसला बढ़ा और उनमें अपनी मेहनत और हुनर के दम पर जिंदगी में कुछ बड़ा और बेहतर करने का विश्वास जागा। ये वही वक्त था जब सूरज ने जिंदगी में एक बड़ा मुकाम हासिल करने का ख्वाब बुनना शुरू किया और अपने भविष्य को संवारने के लिए कॉलेज में दाखिला लिया।वैसे तो सूरज बचपन से ही आईएएस ऑफिसर बनना चाहते थे लेकिन घर की तंग माली हालत उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रही थी। पिता भी प्राइवेट सेक्टर की अपनी नौकरी से रिटायर हो चुके थे। ऊपर से बड़ा बेटा होने के कारण पूरे घर की जिम्मेदारी उनके ही कंधों पर थीं। लिहाजा सूरज ने प्राइवेट ग्रेजुएशन करने के साथ ही घर का खर्चा चलाने के लिए अपने एक दोस्त के साथ इंग्लिश कोचिंग क्लास चलाने का फैसला लिया। लेकिन यहां भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और मकान मालिक ने उनका कोचिंग सेंटर बंद करा दिया।

अतीत के पन्नों को पलटते हुए सूरज बताते हैं कि 2005 का वक्त था जब 19 साल की उम्र में उन्होंने एक कॉल सेंटर में नौकरी का विज्ञापन देखा और इंटरव्यू के लिए नोएडा पहुंच गए। लेकिन यहां भी 7 राउंड में पास होने के बाद कमजोर अंग्रेजी और उच्चारण के चलते अंतिम टेस्ट में फेल हो गए। इसके बाद सूरज ने कंपनी के मैनेजर से खुद को साबित करने के लिए कुछ समय मांगा और जी जान से जुट गए अपने इंग्लिश बोलने के एक्सेंट में सुधार के लिए। इस दौरान उन्होंने जमकर मेहनत की और री-टेस्ट पास कर ही दम लिया। इतना ही नहीं उन्होंने ‘द वॉल ऑफ फेम’ में भी अपनी जगह बनाई। जिसके बाद सूरज को कंपनी से 60 प्रतिशत अप्रेजल मिला। बावजूद अपनी इस सफलता के लिए सूरज खुश नहीं थे, क्योंकि वो जानते थे कि ये नौकरी उनका भविष्य नहीं है।
दो साल तक कॉल सेंटर में नौकरी करने के बाद सूरज जी ने यूपीएससी के अपने सपने को पूरा करने के लिए टेली कॉलर की नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। सूरज के कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ने के फैसले पर उनके बॉस ने उनका इंक्रीमेंट दोगुना कर देने की पेशकश की, लेकिन सूरज नहीं माने। अपनी नौकरी के दौरान सूरज ने जो पैसे बचाए थे उसे लेकर 2007-08 में वे यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए। लेकिन लगभग छह महीने में ही उनके सारे पैसे खत्म हो गए।

बैंक में की पीओ की नौकरी IPS Suraj Singh Parihar Biography

कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ने के बाद एक बार फिर सूरज आर्थिक मुसीबतों से घिर गए। अपने साथ-साथ घर वालों का खर्चा चलाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया। लिहाजा उन्होंने एक बार फिर कोई दूसरी जॉब करने का मन बनाया और एक के बाद एक 8 अलग-अलग बैंकों के पीओ का एग्जाम दिया। उनकी मेहनत रंग भी लाई और उन्होंने सभी परीक्षाएं पास कर क्वालिफाई कर लिया। (IPS Suraj Singh Parihar Biography) सूरज ने सबसे पहले बैंक ऑफ महाराष्ट्र की ठाणे शाखा में ज्वाइन किया और चार महीने तक काम किया। इसी दौरान उनका एसबीआई में भी सलेक्श हो गया और उन्होंने ऑल इंडिया में 7वीं रैंक हासिल की। आगरा, दिल्ली और रूढ़की ब्रांच में काम करने के बाद उनका प्रमोशन हो गया औऱ उन्हें बैंक मैनेजर बनाकर चमोली भेज दिया गया।

वैसे तो बैंक मैनेजर की पोस्ट आज कई युवाओं का सपना होता है लेकिन सूरज ने बैंक मैनेजर की पोस्ट मिलने के बाद अपनी जिंदगी का एक और बड़ा फैसला लेते हुए बैंक की जॉब छोड़ने का निश्चय किया। दरअसल सूरज जानते थे कि ये एक बड़ी पोस्ट है और जिम्मेदारी भी बड़ी है। शायद इस पद पर रहते हुए वो अपने यूपीएससी के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएंगे। (IPS Suraj Singh Parihar Biography)

बैंक की नौकरी छोड़ने के बाद सूरज ने साल 2012 में SSC कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा पास की। इसमें उन्होंने ऑल ओवर इंडिया में 23 रैंक हासिल की और कस्टम-एक्साइज़ डिपार्टमेंट में बतौर इंस्पेक्टर ज्वाइन किया। इसके साथ ही वो एक बार फिर सिविल सर्विस की तैयारी में पूरी शिद्दत के साथ जुट गए।IPS Suraj singh pariharसूरज ने साल 2011 में यूपीएससी का पहला अटेंप्ट दिया जिसमें वो सफल नहीं रहे। इसके बाद उन्होंने दोबारा मेहनत की और साल 2012 में दूसरे अटेंप्ट में इंटरव्यू तक का सफर तय किया। वहीं तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता जरूर मिली लेकिन उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ लेकिन ये सूरज की मंजिल नहीं थी। लिहाजा उन्होंने साल 2015 में चौथी बार खुद को साबित करने का फैसला लिया। इस बार उनकी किस्मत ने साथ दिया और 30 साल की उम्र में उन्होंने ऑल ओवर इंडिया में 189 रैंक हासिल की। आखिरकार उनका सपना पूरा हुआ। और जिंदगी में खुशियों भरी की एक सुबह आई। सूरज आज एक आईपीएस अधिकारी हैं और बतौर एसपी छत्तीसगढ़ के 28वीं जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की कमान संभाल रहे हैं।IPS Suraj singh pariharकामयाबी के बाद अपने लिए बेहतर ज़िंदगी तो सभी चुनते हैं लेकिन ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो खुद सुकून से रहने के बाद भी दूसरों की ज़िंदगी बेहतर बनाने की सोचते हैं। आईपीएस सूरज सिंह परिहार भी ऐसी ही शख्सियत हैं, जो आधुनिक भारत के उन जोशीले युवाओं का नेतृत्व करते हैं जिनके लिए मुश्किलों का सामना करके विजय प्राप्त करना उनका जुनून होता है। सूरज उन लोगों का नेतृत्व करते हैं जो कर्म को भाग्य से ज्यादा अपने जीवन में तरज़ीह देते हैं। सूरज जी ड्यूटी के साथ-साथ अपनी व्यस्त जिंदगी से समय निकालकर उन स्टूडेंट्स और युवाओं को ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा की मुफ्त तैयारी कराते हैं जो सिविल सेवा और गवर्मेंट सेक्टर में जाने के इच्छुक हैं।

सूरज खुद तो सोशल मीडिया पर स्टूडेंट्स को सिविल सर्विस परीक्षाओं के लिए जरूरी टिप्स और फ्री ट्रेनिंग दे ही रहे हैं, साथ ही दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों को भी बच्चों को टिप्स देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अपनी इस मुहिम को लेकर सूरज कहते हैं कि मुझे लगता है कि हमारे पास जो भी काबिलियत है, हमें उसे दूसरे लोगों को सिखानी चाहिए। इससे हमारी काबिलियत की सार्थकता और भी बढ़ जाती है। दरअसल अपनी भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर भूल जाते हैं कि समाज के प्रति भी हमारा कुछ कर्तव्य है। हमारे आस पास कई ऐसे बच्चे हैं जो पैसों के अभाव में बड़े सपने नहीं देख पाते। इन बच्चों के सपने को पर देने की कोशिश की है आईपीएस सूरज सिंह परिहार ने। सूरज ग़रीब और सुविधा से वंचित छात्रों के आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) बनने के सपनों को पूरा कर रहे हैं। सूरज वैसे बच्चों को वेबिनार के माध्यम से आईएएस और आईपीएस परीक्षा की तैयारी करवाते है जो ख़ुद इसकी सामर्थ नहीं रखते लेकिन पढाई का जज़्बा और लगन रखते हैं।

‘युवाओं को मंजिल तक पहुंचाने’ के लिए रखी बुक बैंक की नींवBook Bank initiative by ips suraj singh parihar

हम और आप अपनी पुरानी और नहीं इस्तेमाल होने वाली किताबों का क्या करते हैं? उसे या तो कबाड़ी को बेच देते हैं या फिर वो घरों में पड़े-पड़े धूल खा रही होती हैं। आपके लिए भले ही वो किताब महज रद्दी हो, लेकिन वही किताब किसी की जिंदगी बना सकती है। आपकी पुरानी किताबों से किसी का सपना पूरा हो सकता है। इसी सोच के साथ आईपीएस सूरज जी ने भी एसपी दफ्तर में बुक बैंक की शुरूआत की है। मार्गदर्शन के अभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को हो रही परेशानी को देखते हुए सूरज जी ने बुक बैंक खोलने की सराहनीय पहल की है। इसके लिए उन्होंने वाकायदा सोशल मीडिया में लोगों से बुक डोनेट करने की अपील भी की है। उनकी अपील का असर ये हुआ कि देश-विदेश से लोगों ने किताबें भेजना शुरू कर दिया। बुक बैंक की शुरूआत ही ओमान मस्कट में रहने वाले एक NRI ने 60 किताबें ऑनलाइन शॉपिंग एप के जरिए भेजकर की। वहीं बिलासपुर रेंज के IPS दीपांशु काबरा ने भी सोशल मीडिया में सूरज जी का वीडियो देखते ही बड़ी संख्या में किताबों की खेप बुक बैंक तक पहुंचाया। इस वक्त बुक बैंक में स्कूल के बच्चों से लेकर यूपीएससी तक की किताबें उपलब्ध हैं।

अपनी इस मुहिम को लेकर सूरज बताते हैं कि उन्होंने अप्रैल 2019 में इस बुक बैंक की कल्पना की थी। सूरज के मुताबिक जीपीएम एक दूरस्थ और आदिवासी आबादी वाला जिला है, जहां एक भी गुणवत्ता वाली लाइब्रेरी नहीं है। लिहाजा यूपीएससी की तैयारी के लिए जरुरतमंद और पिछड़े वर्ग के छात्रों को ध्यान में रखकर ये मुहिम चलाई गई है।

सूरज कहते हैं कि अगर मेरे छोटे से योगदान से इस क्षेत्र का कोई छात्र आगे चलकर देश के लिए बड़ा योगदान देता है, तो उससे अच्छी बात कुछ हो नहीं सकती। सूरज आगे कहते हैं कि इस बुक बैंक का एक और उद्देश्य पुलिस के लिए सद्भावना अर्जित करने के साथ ही युवाओं को सार्थक कार्यों में शामिल करना और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक रूप से जोड़ना है। क्योंकि नक्सल प्रभावित इस इलाके में माओवादी आदिवासी युवाओं को बरगला और गुमराह कर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं।IPS Suraj singh pariharआईपीएस सूरज सिंह परिहार को सोशल पुलिसिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए भी पहचाना जाता है। घोर नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में एएसपी रहते हुए उन्होंने नक्सलवाद से जुड़े गुमराह लोगों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने के लिए कई रचनात्मक और सकारात्मक काम किए और अभियान चलाए। इसी के तहत उन्होंने ‘नई सुबह का सूरज’ नाम से एक लघु फिल्म का भी निर्माण किया है। यह शॉर्ट फिल्म नक्सलवाद की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। खास बात यह है कि फिल्म की कहानी, डायलॉग्स, गीत और कविताएं भी खुद सूरज ने ही लिखे हैं। फिल्म में एएसपी सूरज की आवाज़ भी है। लगभग 10 मिनट की इस शॉर्ट-फिल्म की शूटिंग दंतेवाड़ा में हुई है। फिल्म में दंतेवाड़ा जिला पुलिस बल और डीआरसी के 100 जवानों ने ही नक्सलियों की भूमिका निभाई है। फिल्म में दंतेवाड़ा में सरेंडर कैडर के नक्सली भी हैं।

सूरज कहते हैं कि जब उनकी पोस्टिंग दंतेवाड़ा में हुई तो वहां नक्सलियों की स्थिति को देखकर वो बेहद व्याकुल हो गए। जिसके बाद उन्होंने नक्सलियों के जीवन की असली तस्वीर सबके सामने लाने का निर्णय लिया। इसी उद्देश्य से इस शॉर्ट फिल्म का निर्माण किया। इसके अलावा सूरज कविता और वीडियो बनाकर भी लोगों को नक्सलियों से होने वाले ख़तरों के प्रति जागरुक करते हैं। उनका कहना है कि इंडियन पुलिस सर्विस नौकरी नहीं है, एक सेवा है। जिंदगी में कामयाब होने के लिए Work-Study-Hobbies-Play, इन्हीं सब चीज़ों में संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत है।

IPS Suraj singh parihar with family सूरज जी अपनी फैमिली के साथ

बिना किसी शान-ओ-शौकत में पले, एक सामान्य परिवार से अपनी जीवन यात्रा शुरू कर आईपीएस बन चुके सूरज अगर अपने दौर के नौजवानों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं, तो उनकी कामयाबी की मिसाल सिर्फ उनके जीवन का उजाला नहीं, बल्कि उनके हिस्से के जीवन का सबक पूरी युवा पीढ़ी की भी राह को रोशन कर रहा है। इसीलिए वह आज के नौजवानों को ये सीख देना भी अपनी जिम्मेदारी मान रहे हैं कि ‘वे हिम्मत न हारें क्योंकि उनकी मंज़िल उनका इंतज़ार कर रही है।

सूरज जी की कहानी साबित करती है कि जब विपरीत परिस्थितियों में भी कुछ कर दिखाने के इरादे बुलंद हों, राहें खुद-ब-खुद निकल आती हैं, और ऐसी शख्सियतों की मंजिल जमाने के लिए मिसाल बन जाती है। हमारी कोशिश हमेशा आपको हिंदुस्तान की उन गुमनाम हस्तियों से मिलाने की रही है जिन्होंने अपने नए तरीके से बदलाव को एक नई दिशा दी हो और समाज के सामने संभावनाओं की नई राह खोली हो।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments