एक इशारे पर MP की कमलनाथ सरकार गिराने का दावा करने वाली भाजपा की उपचुनाव में हुई करारी हार, इस वजह से झाबुआ उपचुनाव में हारी BJP

मध्य प्रदेश में एक इशारे पर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिराने का दावा करने वाली भाजपा एमपी में हुए एक विधानसभा उपचुनाव की सीट को भी नही बचा पाई। मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले की झाबुआ विधानसभा सीट हेतु उपचुनाव हुआ था। जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार  दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने 27 हजार से अधिक वोटो से जीत हासिल कर ली। भाजपा ने यहाँ पर दो बार के युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष भानु भूरिया को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन भानु को यहाँ करारी हार का सामना करना पड़ा हैं।

एक इशारे पर सरकार गिराने का दावा करने वाली भाजपा की हुई करारी हार 

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार हैं। कांग्रेस 15 वर्ष का वनवास भुगतकर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में 114 विधायक एवं निर्दलीय व सपा-बसपा का समर्थन लेकर कांग्रेस ने एमपी में सरकार बनाई। 108 विधायको के साथ भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सहित कई नेता यह कहते हुए सुने गए थे की पार्टी हाईकमान के एक इशारे पर सरकार गिरा देंगे। लेकिन एक इशारे में सरकार गिराने के दावे भाजपा के खोखले निकल गए क्योकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पहली बार उपचुनाव हुए। जिसमे भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी फिर भी वह इस सीट पर जीत हासिल नही कर पाई। कांग्रेस उम्मीदवार ने यहा पर 27 हजार 804 वोटो से जीत हासिल की है जो झाबुआ विधानसभा की ऐतिहासीक जीत है। इधर कांग्रेस ने यह सीट जीतकर 230 विधानसभा वाले मध्य प्रदेश में 115 विधायक के साथ प्रदेश की सत्ता पर अपनी मोहर लगा दी हैं। एमपी में सरकार बनाने के लिए 116 विधायको की आवश्यकता रहती हैं।

इस वजह से हारी भाजाप – 

झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल करने हेतु कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित उनके एक दर्जन से अधिक मंत्री और कई सारे विधायक लगे हुए थे। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और जीत हासिल कर ली। लेकिन भाजपा क्यों हार गई यह सवाल पुरे प्रदेश में उछाल मारने लगा हैं। भाजपा उम्मीदवार को जिताने के लिए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के कई दिग्गज नेता लगे हुए थे लेकिन फिर भी भाजपा हार गई। बताया जाता है कि जब से भाजपा सत्ता से बाहर हुई है तब से MP के भाजपा संगठन में गुटबाजी देखि जा रही हैं। इस चुनाव में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के उल्टे-सीधे बयान भी हार का कारण बने हैं। भार्गव ने जनता के बीच कुछ और बोला और मीडिया के सामने मुह खोला तो कुछ और ही बोला। बताया यह भी जा रहा हैं कि भाजपा की गुटबाजी झाबुआ विधानसभा में अंदर ही अंदर बढ़ती रही। लेकिन जिम्मेदार नेता डैमेज कंट्रोल नही कर पाए। वे कमलनाथ सरकार के खिलाफ कोई ऐसा बड़ा मुद्दा नही उठा पाए जिससे जनता का मुड़ बदल जाए। हालांकि पार्टी संगठन जरूर तलाश रहा है उस चेहरे को जो यहाँ की हार का ठीकरा अपने सिर पर ले सके अब भाजपा के पास केवल 107 विधायक बचे हैं। अब शायद ही भाजपा नेता सरकार गिराने वाले बयान देंगे। झाबुआ में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के गुमानसिंह डामोर जीते थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में गुमानसिंह को पार्टी ने रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया और वे ऐतिहासिक वोटो से जीते। जिसके बाद पार्टी संगठन के कहने पर गुमानसिंह ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद झाबुआ विधानसभा के लिए उपचुनाव हुआ और भाजपा यहाँ पर हार गई।

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