अयोध्या मामले का वह मुख्य आधार जिसके तहत 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने दिया मंदिर निर्माण का फैसला, खारिज की मुस्लिम पक्ष की याचिका

विगत कई दशकों से अयोध्या में चल रही राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सहीत पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला राम मंदिर के पक्ष में दिया है। जिसके बाद से देशभर में कानून व्यवस्था सख्त है और सभी से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की जा रही है। दिनभर से न्यूज चैनलो पर यह बड़ी खबर लगातार दिखाई जा रही है। लेकिन आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर संवैधानिक पिठ ने विवादित भूमि पर किस वजह से राम मंदिर निर्माण का फैसला दिया है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिक किस वजह से खारिज की है यह आपको बता रहें है।

इस आधार पर आया राम मंदिर के पक्ष में फैसला – 

दिनभर से न्यूज चैनल पर कई तरह की खबरें अयोध्या फैसले को लेकर आई है। लेकिन विवादित भूमि पर 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने  राम मंदिर के निर्माण का फैसला किस आधार के तहत दिया है, यह जानकारी सभी के लिए बेहद जरूरी है। सुप्रिम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने सर्वसहमती से यह माना कि 2.77 एकड़ के जमीनी भाग पर मस्जिद का निर्माण पहले से बने किसी ढांचे को गिराकर किया गया था। अंग्रेजों के समय हिंदुओं ने इस जमीन पर दावा किया और पूजा का अधिकार मांगा तो अंग्रेजो ने विवादित जमीन के मुख्य हिस्से को रैलिंग से दो हिस्सों में बांटकर मुस्लिमों और हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया था। इस जमीन पर बनी मस्जिद में 12वीं एवं 16वीं सदी तक नमाज आदा किए जाने का कोई प्रमाण नही मिला है। इसी को आधार मानते हुए कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी एवं विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण करने हेतु केंद्र सरकार को ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर निर्माण करने का फैसला दिया है।

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