पश्चिम बं’गा’ल चु’ना’व में महिला किसको दें’गी वो’ट? स’र्वे से हुआ ब’ड़ा खु’ला’सा…

पश्चिम बंगाल में विधान-सभा चुनाव होने वाला है जिसको लेकर राजनिति काफी गरमाई हुई है, पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग में अब दो हफ्ते से भी कम वक्त रह गया है, ऐसे में बंगाल में धुआंधार प्रचार हो रहा है तो कोलकाता से दिल्ली तक मीटिंग का दौर भी जारी है, सभी पार्टिया सत्ता पाने के लिए पूरी ज़ोर लगा रही है, सभी पार्टिया अपने स्टार-प्रचारको के साथ साथ कैंडिडेट कि लिस्ट जारी कर रही है और चुनावी वादों से जनता को लुभाने में लगी है. (10 रूपये का रिचार्ज पाने के लिए यहाँ क्लिक करे)

पश्चिम बंगाल कि राजनिति में महिलाओ का वोट अहम माना जा रहा है मुर्शिदाबाद जिला मुख्यालय बरहमपुर में गंगा नदी के किनारे सब्जी बेचने वाली अनसूया महतो निर्विकार भाव से यह बात कहती है. अनसूया हो या फिर मालदा कलेक्टरेट परिसर में अपने आधार कार्ड में संशोधन के लिए आई बासंती मंडल, पश्चिम बंगाल की महिलाएं इस बार तमाम दलों के वादों और दावों को परख रही हैं. ममता बनर्जी सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाएं तो कई शुरू की हैं. लेकिन जमीनी स्तर पर इसका ज्यादा फायदा नहीं मिला है. (तुरंत फ्री 10 रूपये का रिचार्ज पाने लिए यहाँ क्लिक करे भूले नहीं)

मालदा की सामाजिक कार्यकर्ता शबनम जहां कहती हैं महिलाएं अभी तमाम दलों को वादों की कसौटी पर परख रही हैं. वर्ष 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों के नतीजों से साफ है कि टीएमसी को इस तबके का खासा समर्थन मिला था. लेकिन बीते लोकसभा चुनावों से इनका झुकाव बीजेपी की ओर हुआ है. अब इस बार देखा जाए क्या होता है. (सुन्हेरा मौका फ्री 10 रूपये का रिचार्ज पाने लिए यहाँ डबल क्लिक करे और पाए 10 का फ्री रिचार्ज )

कुल मिला कर कहा जा सकता है कि महिला वोटरों को लुभाने के लिए टीएमसी, बीजेपी के बीच तेज होती होड़ ने महिलाओं को फिलहाल असमंजस में डाल दिया है. दूसरी ओर, लेफ्ट-कांग्रेस गठजोड़ की निगाहें भी इस तबके के वोटरों पर हैं. (सुन्हेरा मौका फ्री 10 रूपये का रिचार्ज पाने लिए यहाँ डबल क्लिक करे और पाए 10 का फ्री रिचार्ज )

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